Friday, July 8, 2016

तू जो नहीं हैं तो कुछ भी नहीं है

तू जो नहीं हैं तो कुछ भी नहीं है
ये माना की महफ़िल जवान है हसीं हैं

मुझे फिर तबाह कर, मुझे फिर रुला जा
सितम करने वाले, कहीं से तू आ जा
आँखों में तेरी ही, सूरत बसी है
तेरी ही तरह तेरा गम भी हंसी है
तू जो नहीं...

समझ में न आये, ये क्या माजरा है
तुझे पा के दिल में ये खाली सा क्या है
क्यूँ हर वक़्त दिल में कोई बेकली है
क्यूँ हर वक़्त सीने में रहती कमी है
तू जो नहीं...

जिधर भी ये देखें, जहां भी ये जाएँ
तुझे ढूंढती है, ये पागल निगाहें
मैं जिंदा हूँ लेकिन, कहाँ ज़िन्दगी है
मेरी ज़िन्दगी तू कहाँ खो गयी है
तू जो नहीं...

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