Thursday, June 16, 2016

जग घूमेया थारे जैसा ना कोई , जग घूमेया थारे जैसा ना कोई

ओ ...................
ना वो अँखियाँ रूहानी कहीं, ना वो चेहरा नुरानी कहीं
कहीं दिल वाली बातें भी ना, ना वो सजरी  जवानी कहीं
जग घूमेया थारे जैसा ना कोई , जग घूमेया थारे जैसा ना कोई
ना तो हंसना रूमानी कहीं, ना तो खुशबू सुहानी कहीं 
ना वो रंगली अदाएं देखीं , ना वो प्यारी सी नादानी कहीं 
जैसी तू है वैसी रहना
जग घूमेया थारे जैसा ना कोई , जग घूमेया थारे जैसा ना कोई -2

बारिशों के मौसमो की, भीगी हरियाली तू 
सर्दियों में गालों पे जो, आती है वो लाली तू 
रातों का सुकून-2 भी है , सुबह की अज़ान है 
चाहतों की चादरों में , मैंने है संभाली तू
कहीं आग जैसे जलती है , बने बरखा का पाणी कहीं 
कभी मन जाणा चुपके से , यूँ ही अपनी चलाणी  कहीं 
जैसी तू है वैसी रहना
जग घूमेया थारे जैसा ना कोई , जग घूमेया थारे जैसा ना कोई 

अपणे नसीबों में या , होंसले की बातों में 
सुखों और दुखों वाली , सारी सौगातों में
संग तुझे रखना है -2 तूने संग रहना ,
मेरी दुनिया में भी, मेरे जज्बातों में
तेरी मिलती निशानी कहीं, जो है सबको दिखानी कहीं 
तू तो जानती है मरके भी , मुझे आती है निभानी कहीं 
वो ही करना है जो है कहना 

(जग घूमेया थारे जैसा ना कोई 
जग घूमेया थारे जैसा ना कोई-2)

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